डॉक्टर साहब के ‘दबंग’ अंदाज़ ने सोशल मीडिया पर मचाया बवाल, बंदूक के साथ तस्वीरें वायरल!
एक तरफ कई साल पुराने क्लीनिक की विरासत, दूसरी तरफ़ पिस्तौल और बंदूकों के साथ डॉक्टर की तस्वीरों ने खड़े किए डॉक्टरी पेशे की गरिमा पर गंभीर सवाल।
संवादाता – राष्ट्रीय आचरण



(शाहजहाँपुर), (5 अक्टूबर ): समाज में डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है, लेकिन जब उन्हीं के पेशे से जुड़े किसी व्यक्ति की ऐसी तस्वीरें सामने आएं जो उनके पद की गरिमा के विपरीत हों, तो सवाल उठना लाज़मी है। ऐसा ही एक मामला कस्बे के जाने-माने ‘शफीक हेल्थ केयर क्लीनिक’ के डॉ. ज़ुबिन खान को लेकर सामने आया है, जिनकी कुछ पुरानी तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रही हैं।
क्लीनिक के बाहर लगे बोर्ड के अनुसार, यह संस्थान “100 वर्षों से आपकी सेवा में” होने का दावा करता है और डॉ. ज़ुबिन खान को एक क्वालिफाइड चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत करता है। लेकिन जो तस्वीरें सामने आई हैं, वे एक बिल्कुल अलग ही कहानी बयां कर रही हैं।
क्या है वायरल तस्वीरों में?
वायरल हो रही तस्वीरों में से एक में डॉ. ज़ुबिन खान अपने क्लीनिक जैसी दिखने वाली जगह पर कुर्सी पर बैठे हैं और मुस्कुराते हुए एक रिवॉल्वर (पिस्तौल) को अपनी कनपटी पर लगाए हुए हैं। उनके सामने मेज़ पर मेडिकल उपकरण भी रखे नज़र आ रहे हैं।
एक अन्य तस्वीर में, वह ग्रामीण परिवेश में एक चारपाई पर लेटकर हुक्का पीते हुए दिखाई दे रहे हैं। चिंता की बात यह है कि उनके ठीक बगल में दो लंबी बंदूकें (राइफल) भी रखी हुई हैं।
कानूनी और नैतिक सवाल
इन तस्वीरों के सामने आने के बाद, लोगों के बीच यह बहस छिड़ गई है कि क्या एक डॉक्टर, जिनका पेशा लोगों की जान बचाने से जुड़ा है, को इस तरह हथियारों के साथ तस्वीरें खिंचवानी चाहिए? ये तस्वीरें भले ही उनके निजी जीवन की हों, लेकिन जब ये सार्वजनिक होती हैं, तो वे उनके पेशे की छवि पर गहरा असर डालती हैं।
यह भी एक गंभीर सवाल है कि तस्वीरों में दिख रहे हथियार लाइसेंसी हैं या नहीं, और क्या इस तरह से सार्वजनिक तौर पर हथियारों का प्रदर्शन करना कानून की दृष्टि से उचित है? एक डॉक्टर के हाथों में लोग अपनी ज़िंदगी सौंपते हैं, ऐसे में उनका यह अंदाज़ समाज में क्या संदेश देता है?
हमारा पक्ष
एक ज़िम्मेदार मीडिया के तौर पर, हम इन तस्वीरों की सत्यता की पुष्टि करते हैं, जो कि डॉक्टर साहब के सोशल मीडिया प्रोफाइल से ली गई हैं। हमारा उद्देश्य किसी की व्यक्तिगत छवि को ठेस पहुंचाना नहीं है, बल्कि समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल रखना है। यह खबर इसी उद्देश्य से प्रकाशित की जा रही है कि मेडिकल काउंसिल और संबंधित अधिकारियों को इस मामले का संज्ञान लेना चाहिए और यह जांच करनी चाहिए कि क्या यह आचरण मेडिकल पेशे की नैतिकता के खिलाफ है।
हमने इस विषय पर डॉ. ज़ुबिन खान से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। यदि उनका कोई भी स्पष्टीकरण आता है, तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

