January 10, 2026

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पंचकल्याणक महा महोत्सव में भगवान के माता-पिता का तिलक व भव्य आमंत्रण समारोह

विशेष संवादाता – प्रशांत पंवार

सूर्य पैलेस दिल्ली रोड स्थित नव निर्मित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आज मुख्य पात्र भगवान के माता-पिता श्री प्रदीप जैन व श्रीमती सुधा जैन का साधु सेवा समिति द्वारा तिलक व आमंत्रण समारोह संपन्न हुआ।

समारोह में विशाल जनसमूह ने दोनों माता-पिता को तिलक अर्पित कर सम्मान दिया, शुभकामनाएँ दीं और महोत्सव में सम्मिलित होने का निमंत्रण स्वीकार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने नव निर्मित मंदिर के दर्शन किए और पंचकल्याणक महोत्सव के लिए की गई तैयारियों का भी अवलोकन किया।

इस पावन अवसर पर परमपूज्य आचार्य वासुनंदी जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके शिष्य उपाध्याय श्री वृषभानंद जी मुनिराज ससंघ राजस्थान से बिहार करके मेरठ की ओर आगे बढ़ रहे हैं ताकि वे भी पंचकल्याणक में सम्मिलित हो सकें।

कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र ऋतुराज, साधु सेवा समिति कमला नगर के सभी सदस्य तथा अनेक गणमान्य समाजजन उपस्थित रहे।

— संजीव जैन, मीडिया प्रभारी

⭐ मुख्य पात्रों का परिचय : श्री प्रदीप जैन व श्रीमती सुधा जैन

श्री प्रदीप जैन जी

मेरठ में जन्मे श्री प्रदीप कुमार जैन जी, श्री मांदर दास जैन के बड़े पुत्र हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपने परिश्रम और निष्ठा से जीवन में सम्मान और सफलता अर्जित की। तीन बेटियों और एक बेटे के पिता, उन्होंने अपनी सामर्थ्य से सभी संतानें योग्य परिवारों में विवाह कर सुखमय जीवन दिया।

श्रीमती सुधा जैन जी

बड़ौत की मूल निवासी सुधा जैन जी अत्यंत धार्मिक, सरल और सेवा-भाव रखने वाली मृदुभाषी महिला हैं। उनके जीवन का उद्देश्य धर्म, सेवा और परोपकार रहा है। उन्होंने केवल स्वयं नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को जैन धर्म की ओर प्रेरित किया।

सुधा जैन जी दो बार सोधर्म इंद्र बनीं और अनेक विधान, पाठ व धार्मिक आयोजन कराए। मेरठ के पंजाबी पूरा में संत भवन का निर्माण कराना उनका प्रमुख सेवा कार्य रहा है। वे जहाँ भी आवश्यकता होती है, बिना दिखावे के निष्ठापूर्वक दान और सहयोग करती रही हैं।

धर्मकार्य का संकल्प और मंदिर निर्माण

पिता जी के स्वर्गवास के बाद प्रदीप जैन जी और सुधा जैन जी के मन में एक बड़ा धर्मकार्य करने का संकल्प उत्पन्न हुआ। पहले वृद्धाश्रम निर्माण की योजना बनी पर परिस्थितियाँ अनुकूल न होने से कार्य रुक गया। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया, और आज नव निर्मित यह दिव्य मंदिर उसी संकल्प की सिद्धि का जीवंत प्रमाण है।

दोनों माता-पिता की जीवनशैली धर्म, सेवा, त्याग और प्रेरणा का प्रतीक है। उनके कार्यों से संपूर्ण परिवार निरंतर प्रेरणा प्राप्त करता है।

होत्सव में भगवान के माता-पिता का तिलक व भव्य आमंत्रण समारोह

सूर्य पैलेस दिल्ली रोड स्थित नव निर्मित श्री 1008 चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अवसर पर आज मुख्य पात्र भगवान के माता-पिता श्री प्रदीप जैन व श्रीमती सुधा जैन का साधु सेवा समिति द्वारा तिलक व आमंत्रण समारोह संपन्न हुआ।

समारोह में विशाल जनसमूह ने दोनों माता-पिता को तिलक अर्पित कर सम्मान दिया, शुभकामनाएँ दीं और महोत्सव में सम्मिलित होने का निमंत्रण स्वीकार किया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने नव निर्मित मंदिर के दर्शन किए और पंचकल्याणक महोत्सव के लिए की गई तैयारियों का भी अवलोकन किया।

इस पावन अवसर पर परमपूज्य आचार्य वासुनंदी जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त हुआ। उनके शिष्य उपाध्याय श्री वृषभानंद जी मुनिराज ससंघ राजस्थान से बिहार करके मेरठ की ओर आगे बढ़ रहे हैं ताकि वे भी पंचकल्याणक में सम्मिलित हो सकें।

कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्र ऋतुराज, साधु सेवा समिति कमला नगर के सभी सदस्य तथा अनेक गणमान्य समाजजन उपस्थित रहे।

— संजीव जैन, मीडिया प्रभारी

⭐ मुख्य पात्रों का परिचय : श्री प्रदीप जैन व श्रीमती सुधा जैन

श्री प्रदीप जैन जी

मेरठ में जन्मे श्री प्रदीप कुमार जैन जी, श्री मांदर दास जैन के बड़े पुत्र हैं। परिवार की जिम्मेदारियों को निभाते हुए उन्होंने अपने परिश्रम और निष्ठा से जीवन में सम्मान और सफलता अर्जित की। तीन बेटियों और एक बेटे के पिता, उन्होंने अपनी सामर्थ्य से सभी संतानें योग्य परिवारों में विवाह कर सुखमय जीवन दिया।

श्रीमती सुधा जैन जी

बड़ौत की मूल निवासी सुधा जैन जी अत्यंत धार्मिक, सरल और सेवा-भाव रखने वाली मृदुभाषी महिला हैं। उनके जीवन का उद्देश्य धर्म, सेवा और परोपकार रहा है। उन्होंने केवल स्वयं नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को जैन धर्म की ओर प्रेरित किया।

सुधा जैन जी दो बार सोधर्म इंद्र बनीं और अनेक विधान, पाठ व धार्मिक आयोजन कराए। मेरठ के पंजाबी पूरा में संत भवन का निर्माण कराना उनका प्रमुख सेवा कार्य रहा है। वे जहाँ भी आवश्यकता होती है, बिना दिखावे के निष्ठापूर्वक दान और सहयोग करती रही हैं।

धर्मकार्य का संकल्प और मंदिर निर्माण

पिता जी के स्वर्गवास के बाद प्रदीप जैन जी और सुधा जैन जी के मन में एक बड़ा धर्मकार्य करने का संकल्प उत्पन्न हुआ। पहले वृद्धाश्रम निर्माण की योजना बनी पर परिस्थितियाँ अनुकूल न होने से कार्य रुक गया। इसके बाद उन्होंने मंदिर निर्माण का संकल्प लिया, और आज नव निर्मित यह दिव्य मंदिर उसी संकल्प की सिद्धि का जीवंत प्रमाण है।

दोनों माता-पिता की जीवनशैली धर्म, सेवा, त्याग और प्रेरणा का प्रतीक है। उनके कार्यों से संपूर्ण परिवार निरंतर प्रेरणा प्राप्त करता है।

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